नेचर केम्प का आनंद

छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के तत्वावधान में सुरम्य पहाडियो के बीच, महानदी की घाटी में बसे कांकेर जिले के छोटे से गांव मुडपार की सीमाओ के भीतर स्थित जन विज्ञान केन्द्र , दिनांक २०-२१ अगस्त २०११ को विद्यार्थियों के ठहाकों और गीतों से गुलजार हो गया. अवसर था इस छोटे से गांव में जिले भर के ७ स्कूलों के बच्चों और शिक्षको की भागीदारी से आयोजित नेचर केम्प का जिसमे छोटी-छोटी गतिविधियों के द्वारा बच्चों ने खेल-खेल में आदमी और प्रकृति के अंतर्संबंधो को जानने और समझने का प्रयास किया, प्रकृति के अलग-अलग घटकों की रिश्तेदारी समझी और क्लासरूम के बाहर भी विज्ञान जैसे विषयों को समझा जा सकता है, यह जाना.

नेचर केम्प की अनौपचारिक शुरुआत, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान कांकेर के उप-प्राचार्य श्री सी.आर.सोनवानी के उद् बोधन तथा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक श्री अशोक कुम्भकार के गीत से हुई. बच्चों ने आपस में परिचय प्राप्त किया, तत्पश्चात ६ समूहों में उन्हें बता गया. उन्होंने अपने समूहों के नाम आपस में चर्चा करके १ वन २. जल ३.मिट्टी ४. वायु ५. आकाश और ६. चिड़िया मैना रखे और अपने ग्रुप लीडर का चयन किया. इसे उन्होंने सभागार से बाहर जाकर अलग-अलग वृतो में बैठकर किया. आधे घंटे के बाद जब वे सभागार में एकत्र हुए तो सभी ग्रुप लीडर ने अपने ग्रुप का परिचय दिया और अपने समूह नाम का महत्व बताया.

नेचर केम्प की अनौपचारिक शुरुआत, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान कांकेर के उप-प्राचार्य श्री सी.आर.सोनवानी के उद् बोधन तथा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक श्री अशोक कुम्भकार के गीत से हुई. बच्चों ने आपस में परिचय प्राप्त किया, तत्पश्चात ६ समूहों में उन्हें बता गया. उन्होंने अपने समूहों के नाम आपस में चर्चा करके १ वन २. जल ३.मिट्टी ४. वायु ५. आकाश और ६. चिड़िया मैना रखे और अपने ग्रुप लीडर का चयन किया. इसे उन्होंने सभागार से बाहर जाकर अलग-अलग वृतो में बैठकर किया. आधे घंटे के बाद जब वे सभागार में एकत्र हुए तो सभी ग्रुप लीडर ने अपने ग्रुप का परिचय दिया और अपने समूह नाम का महत्व बताया.

कौन बनाया ? कैसे बनाया ? क्यों इसे बनाया ? इतने बड़े आकाश में इतना रंग क्यों भर दिया ? सांप का खेल, मोर का नाँच, भूखे शेरों कि आंखे किसने बनाया ये सब चीजे अजूबा लगता है मुझे | किसने दिया आँखों में आंसू होठों पर दी हंसी किसने दिया मान-सम्मान दिल में हमारी खुशी || जो भी हो, जो भी रहें, जहाँ भी रहें वों | ढूंढते रहेंगे सारी जिंदगी जहाँ भी रहें वों ||